Posts

जनजातियाँ , खानाबदोश और एक जगह बसे हुये समुदाय

Image
इस उठापटक के बीच ही कलाओं , दस्तकारियों और उत्पादक गतिविधियों की नयी किस्में शहरों और गाँवों में फल - फूल रही थीं । एक लंबे अंतराल में कई महत्त्वपूर्ण राजनैतिक , सामाजिक और आर्थिक परिवर्तन हुए । लेकिन सामाजिक परिवर्तन हर जगह एक समान नहीं थे , क्योंकि अलग - अलग किस्म के समाज अलग - अलग तरीकों से विकसित हुए । ऐसा कैसे और क्यों हुआ , यह समझना महत्त्वपूर्ण है । इस उपमहाद्वीप के बड़े हिस्से में समाज , वर्ण के नियमानुसार पहले से ही विभाजित था । ब्राह्मणों द्वारा सुझाए गए ये नियम , बड़े - बड़े राज्यों के राजाओं द्वारा स्वीकार किए गए थे । इससे ऊँच और नीच तथा अमीर और गरीब के बीच का फ़ासला बढ़ा । दिल्ली के सुलतानों और मुग़लों के काल में श्रेणीबद्ध समाज ज़्यादा जटिल हो गया ।  __________________________________________ बड़े शहरों से परे जनजातीय समाज-  अलबत्ता , दूसरे तरह के समाज भी उस समय मौजूद थे । उपमहाद्वीप के कई समाज ब्राह्मणों द्वारा सुझाए गए सामाजिक नियमों और कर्मकांडों को नहीं मानते थे और न ही वे कई असमान वर्गों में विभाजित थे । अकसर ऐसे समाजों को जनजातियाँ कहा जाता रहा है । प्रत्ये...

शासक और इमारते

Image
कुतुबमीनार के पहले छज्जे को प्रदर्शित करता है । कुत्बउद्दीन ऐबक ने लगभग 1199 में इसका निर्माण करवाया था । छज्जे के नीचे छोटे मेहराब तथा ज्यामितीय रूपरेखाओं द्वारा निर्मित नमूने को देखें । क्या आपको छज्जे के नीचे अभिलेखों की दो पट्टियाँ दिखाई दे रही है । ये अभिलेख अरबी में हैं । गौर करें कि मीनार का बाहरी हिस्सा घुमावदार तथा कोणीय है । ऐसी सतह पर अभिलेख लिखने के लिए काफ़ी परिशुद्धता की आवश्यकता होती थी । सर्वाधिक योग्य कारीगर ही इस कार्य को संपन्न कर सकते थे । ) याद रखें कि आठ सौ वर्ष पूर्व केवल कुछ ही इमारतें पत्थर या ईंटों की बनी होती थीं । तेरहवीं शताब्दी में कुत्वमीनार जैसी इमारत का देखने वालों पर क्या प्रभाव पड़ा होगा ? आठवीं और अठारहवीं शताब्दियों के बीच राजाओं तथा उनके अधिकारियों ने दो तरह की इमारतों का निर्माण किया । पहली तरह की इमारतों में सुरक्षित ,संरक्षित तथा इस दुनिया और दूसरी दुनिया में आराम - विराम की भव्य जगहें - किले , महल तथा मकबरे थे । दूसरी श्रेणी में मंदिर , मसजिद , हौज़ , कुएँ , सराय तथा बाज़ार जैसी जनता के उपयोग की इमारतें थीं । राजाओं से यह अपेक्षा की जाती थी कि ...

मुगल साम्राज्य!

Image
मध्यकाल में किसी भी शासक के लिए भारतीय उपमहाद्वीप जैसे बड़े क्षेत्र पर , जहाँ लोगों एवं संस्कृतियों में इतनी अधिक विविधताएँ हो , शासन कर पाना अत्यंत ही कठिन कार्य था । अपने पूर्ववर्तियों के विपरीत मुग़लों ने एक साम्राज्य की स्थापना की और वह कार्य पूरा किया , जो अब तक केवल छोटी अवधियों के लिए ही संभव जान पड़ता था । सोलहवीं सदी के उत्तरार्ध से , इन्होंने दिल्ली और आगरा से अपने राज्य का विस्तार शुरू किया और सत्रहवीं शताब्दी में लगभग संपूर्ण महाद्वीप पर अधिकार प्राप्त कर लिया । उन्होंने प्रशासन के ढाँचे तथा शासन संबंधी जो विचार लागू किए , वे उनके राज्य के पतन के बाद भी टिके रहे । यह एक ऐसी राजनैतिक धरोहर थी . जिसके प्रभाव से उपमहाद्वीप में उनके पश्चात् आने वाले शासक अपने को अछूता न रख सकें । आज भारत के प्रधानमंत्री , स्वतंत्रता दिवस पर मुग़ल शासकों के निवासस्थान , दिल्ली के लालकिले की प्राचीर से राष्ट्र को संबोधित करते हैं । __________________________________________ मुग़ल कौन थे? मुगल कौन थे ? मुग़ल दो महान शासक वंशों के वंशज थे । माता की ओर से वे मंगोल शासक चंगेज़ खान जो चीन औ...

मुगल लघु जीवनी

Image
बाबर 1526-1530  • 1526 में पानीपत के मैदान में इब्राहिम लोदी एवं उसके अफ़गान समर्थकों को हराया ।  •1527 में खानुवा में राणा सांगा , राजपूत राजाओं और उनके समर्थकों को हराया । • 1528 में चंदेरी में राजपूतों को हराया ।  अपनी मृत्यु से पहले दिल्ली और आगरा में मुग़ल नियंत्रण स्थापित किया । __________________________________________ हुमायूँ 1530-1540 एवं 1555-1556  ( 1 ) हुमायूँ ने अपने पिता की वसीयत के अनुसार जायदाद का बँटवारा किया । प्रत्येक भाई को एक एक प्रांत मिला । उसके भाई मिर्जा कामरान की महत्वाकांक्षाओं के कारण हुमायूँ अपने अफशान प्रतिद्वंद्वियों के सामने फीका पड़ गया । शेर खान ने हुमायूँ को दो बार हराया -1539 में चौसा में और 1540 में कन्नौज में । इन पराजयों ने उसे ईरान की ओर भागने को बाध्य किया ।  ( 2 ) ईरान में हुमायूँ ने सफ़ाविद शाह की मदद ली । उसने 1555 में दिल्ली पर पुनः कब्जा कर लिया परंतु उससे अगले वर्ष इस इमारत में एक दुर्घटना में उसकी मृत्यु हो गयी । __________________________________________ •अकबर 1556-1605 • 13 वर्ष की अल्पाय...

मुग़ल साम्राज्य

Image
मध्यकाल में किसी भी शासक के लिए भारतीय उपमहाद्वीप जैसे बड़े क्षेत्र पर , जहाँ लोगों एवं संस्कृतियों में इतनी अधिक विविधताएँ हो , शासन कर पाना अत्यंत ही कठिन कार्य था । अपने पूर्ववर्तियों के विपरीत मुग़लों ने एक साम्राज्य की स्थापना की और वह कार्य पूरा किया , जो अब तक केवल छोटी अवधियों के लिए ही संभव जान पड़ता था । सोलहवीं सदी के उत्तरार्ध से , इन्होंने दिल्ली और आगरा से अपने राज्य का विस्तार शुरू किया और सत्रहवीं शताब्दी में लगभग संपूर्ण महाद्वीप पर अधिकार प्राप्त कर लिया । उन्होंने प्रशासन के ढाँचे तथा शासन संबंधी जो विचार लागू किए , वे उनके राज्य के पतन के बाद भी टिके रहे । यह एक ऐसी राजनैतिक धरोहर थी , जिसके प्रभाव से उपमहाद्वीप में उनके पश्चात् आने वाले शासक अपने को अछूता न रख सकें । आज भारत के प्रधानमंत्री , स्वतंत्रता दिवस पर मुग़ल शासकों के निवासस्थान , दिल्ली के लालकिले की प्राचीर से राष्ट्र को के जीवन के  •मुग़ल कौन थे? ______________________________  मुग़ल दो महान शासक वंशों के वंशज थे । माता की ओर से वे मंगोल शासक चंगेज़ खान जो चीन और मध्य एशिया के कुछ भा...

MUGHALS SHORT BIOGRAPHY

Image
                     MUGHAL SAMRAT     PRAMUKH ABHIYAN AUR GHATNAYEN BABAR 1526 SE 1530        1526 mein Panipat ke maidan mein Ibrahim Lodhi aur uske Afghan samarthan ko haraya. 1527 mein main Khandwa mein Rana sanga Rajput rajyon aur aur unke sambandh ko haraya. 1528 mein Chanderi mein rajputon ko haraya. Apni mrutyu se Pahle a Delhi aur Agra mein Mughal niyantran sthapit Kiya. __________________________________________        HUMAYUN 1530- 1540 AUR 1555-1556   (1) . Humayun ne Apne pita ki wasiyat ke anusar jaaydaad ka batwara Kiya. Pratyek bhai ko ek ek prant Mila. Uske bhai Mirza Kamran ki mahatva kanchon Ke Karan Humayun Apne Afghan pratidinon ke samne  fika pad Gaya. Sher Khan ne Humayun  ko Do bar haraya -1539 me chausa main Aur  1540 mein Kannauj mein. Ine Hara ne use Iran jaane per majbur Kiya . (2). Iran mein Humayun ne safawi Sh...

SHINDU GHATI SABHYATA

Image
Bharti sanskriti vishv ki mahan sanskrityo me se ek Hai. Hamare baidhik rachnao ke adhar par Ham Bharti hamare parachin Itihaas ko bade Gaurav ke sath Vishva Ke samne rakhta hai. Lekin hamare Vaidik Sanskriti se bhi  Pahle mahare Bharat bhumi per ek  sabhyata vash karti thi apne samay kal Ki Vishva ki sabse unnat aur mahan sabhyata thi. Jab Bhartiya upmahadeep mein aayo ka awagaman se Pahle ek vikassheel Desh tha Iske Nagar Vishva ke sabse utkrusht racha badh tarike se Banaye nagar the Vish ki sari GYAT Sabhyatye nadiyo Nadiyo ke kinare fali fuli thi Aur viksht hui jaisa ki missar ki sabhayta dajla aur farat nadi ke kinare pai gai, chin ki sabhayta Ylon nadi ke kinare waise hi bharat Ki sabhayta shindhu nadi ke kinare pai gyai . Ise SHINDU GHATI sabhyata bhi kahte hai. San 1826 me Sir chals mesan naam ke ek angrej Saksh ne Bharat ke uthar-pachim Panjab chhet ka dura kar rhe the. Jo ki aaj ka pakisthan ka hissa hai Unhone wha ka hddapa Chhet ke Jamin me ...