जनजातियाँ , खानाबदोश और एक जगह बसे हुये समुदाय
इस उठापटक के बीच ही कलाओं , दस्तकारियों और उत्पादक गतिविधियों की नयी किस्में शहरों और गाँवों में फल - फूल रही थीं । एक लंबे अंतराल में कई महत्त्वपूर्ण राजनैतिक , सामाजिक और आर्थिक परिवर्तन हुए । लेकिन सामाजिक परिवर्तन हर जगह एक समान नहीं थे , क्योंकि अलग - अलग किस्म के समाज अलग - अलग तरीकों से विकसित हुए । ऐसा कैसे और क्यों हुआ , यह समझना महत्त्वपूर्ण है । इस उपमहाद्वीप के बड़े हिस्से में समाज , वर्ण के नियमानुसार पहले से ही विभाजित था । ब्राह्मणों द्वारा सुझाए गए ये नियम , बड़े - बड़े राज्यों के राजाओं द्वारा स्वीकार किए गए थे । इससे ऊँच और नीच तथा अमीर और गरीब के बीच का फ़ासला बढ़ा । दिल्ली के सुलतानों और मुग़लों के काल में श्रेणीबद्ध समाज ज़्यादा जटिल हो गया । __________________________________________ बड़े शहरों से परे जनजातीय समाज- अलबत्ता , दूसरे तरह के समाज भी उस समय मौजूद थे । उपमहाद्वीप के कई समाज ब्राह्मणों द्वारा सुझाए गए सामाजिक नियमों और कर्मकांडों को नहीं मानते थे और न ही वे कई असमान वर्गों में विभाजित थे । अकसर ऐसे समाजों को जनजातियाँ कहा जाता रहा है । प्रत्ये...