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राज्य , राजा , और एक प्राचीन गणराज्य

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कुछ लोग शासक कैसे बने ?  लगभग पचास वर्षों से हम अपने शासकों का चुनाव मतदान के जरिए करते आ रहे हैं । लेकिन बहुत पहले लोग शासक कैसे बनते थे ? हमने अध्याय 5 में यह पढ़ा है कि कुछ राजा संभवतः जन यानी लोगों द्वारा चुने जाते थे । परन्तु करीब 3000 साल पहले राजा बनने की इस प्रक्रिया में कुछ परिवर्तन दिखाई दिए । कुछ लोग बड़े - बड़े यज्ञों को आयोजित कर राजा के रूप में प्रतिष्ठित हो गए । अश्वमेध यज्ञ एक ऐसा ही आयोजन था । इसमें एक घोड़े को राजा के लोगों की देखरेख में स्वतंत्र विचरण के लिए छोड़ दिया जाता था । इस घोड़े को किसी दूसरे राजा ने रोका तो उसे वहाँ अश्वमेध यज्ञ करने वाले राजा से लड़ाई करनी पड़ती थी । अगर उन्होंने घोड़े को जाने दिया तो इसका मतलब यह होता था कि अश्वमेध यज्ञ करने वाला राजा उनसे ज़्यादा शक्तिशाली था । इसके बाद उन राजाओं को यज्ञ में आमंत्रित किया जाता था । यह यज्ञ विशिष्ट पुरोहितों द्वारा सम्पन्न किया जाता था । इसके लिए उन्हें उपहारों से सम्मानित किया जाता था । अश्वमेध यज्ञ करने वाला राजा बहुत शक्तिशाली माना जाता था । यज्ञ में आमंत्रित सभी राजा उसके लिए उपहार लाते थे । इन सभी...

क्या बताती है हमे किताबें और क़ब्रे

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दुनिया के प्राचीनतम ग्रंथों में एक  शायद तुमने वेदों के बारे में सुना होगा । वेद चार हैं ऋग्वेद , सामवेद , यजुर्वेद तथा अथर्ववेद । सबसे पुराना वेद है . ऋग्वेद जिसकी रचना लगभग 3500 साल पहले हुई । ऋग्वेद में एक हजार से ज्यादा प्रार्थनाएँ हैं जिन्हें , सूक्त कहा गया है । सूक्त का मतलब है , अच्छी तरह से बोला गया । ये विभिन्न देवी - देवताओं की स्तुति में रचे गए हैं । इनमें से तीन देवता बहुत महत्वपूर्ण हैं : अग्नि , इन्द्र और सोम । अग्नि आग के देवता , इन्द्र युद्ध के देवता हैं और सोम एक पौधा है , जिससे एक खास पेय बनाया जाता था । वैदिक प्रार्थनाओं की रचना ऋषियों ने की थी । आचार्य विद्यार्थियों को इन्हें अक्षरों , शब्दों और वाक्यों में बाँटकर , सस्वर पाठ द्वारा कंठस्थ करवाते थे । अधिकांश सूक्तों के रचयिता , सीखने और सिखाने वाले पुरुष थे । कुछ प्रार्थनाओं की रचना महिलाओं ने भी की थी । ऋग्वेद की भाषा प्राक् संस्कृत या वैदिक संस्कृत कहलाती है । तुम स्कूल में जो संस्कृत पढ़ती हो उससे यह भाषा थोड़ी भिन्न है ।                   संस्कृत और अन्य भाषाएँ ...

आरंभिक नगर (2)

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फ़ेकॅन्स पत्थर और शंख प्राकृतिक तौर पर पाए जाते हैं , लेकिन फ़ेयन्स को कृत्रिम रूप से तैयार किया जाता है । बालू या स्फटिक पत्थरों के चूर्ण को गोंद में मिलाकर उनसे वस्तुएँ बनाई जाती थीं । उसके बाद उन वस्तुओं पर एक चिकनी परत चढ़ाई जाती थी । इस चिकनी परत के रंग प्राय : नीले या हल्के समुद्री हरे होते थे । फ़ेयन्स से मनके , चूड़ियाँ , बाले और छोटे बर्तन बनाए जाते थे । कच्चे माल की खोज में  कच्चा माल उन पदार्थो को कहते हैं जो या तो प्राकृतिक रूप से मिलते हैं या फिर किसान या पशुपालक उनका उत्पादन करते हैं जैसे लकड़ी या धातुओं के अयस्क प्राकृतिक रूप से उपलब्ध कच्चे माल हैं । इनसे फिर कई तरह की चीजें बनाई जाती हैं । मिसाल के तौर पर किसानों द्वारा पैदा किए गए कपास को कच्चा माल कहते हैं , जिससे बाद में कताई - बुनाई करके कपड़ा तैयार किया जाता है । हड़प्पा में लोगों को कई चीजें वहीं मिलती थीं , लेकिन ताँबा , लोहा , सोना , चाँदी और बहुमूल्य पत्थरों जैसे पदार्थों का वे दूर - दूर से आयात करते थे । हड़प्पा के लोग ताँबे का आयात सम्भवतः आज के राजस्थान से करते थे । यहाँ तक ...

आरंभिक नगर ( पार्ट 1 )

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हड़प्पा की कहानी  अक्सर पुरानी इमारत अपनी कहानी बताती है । लगभग 150 साल पहले जब पंजाब में पहली बार रेलवे लाइनें बिछाई जा रही थीं , तो इस काम में जुटे इंजीनियरों को अचानक हड़प्पा पुरास्थल मिला , जो आधुनिक पाकिस्तान में है । उन्होंने सोचा कि यह एक ऐसा खंडहर है , जहाँ से अच्छी ईंटें मिलेंगी । यह सोचकर वे हड़प्पा के खंडहरों से हज़ारों ईंटें उखाड़ ले गए जिससे उन्होंने रेलवे लाइनें बिछाई । इससे कई इमारतें पूरी तरह नष्ट हो गईं । उसके बाद लगभग 80 साल पहले पुरातत्त्वविदों ने इस स्थल को ढूँढ़ा और तब पता चला कि यह खंडहर उपमहाद्वीप के सबसे पुराने शहरों में से एक है । चूँकि स नगर की खोज सबसे पहले हुई थी , इसीलिए बाद में मिलने जाले इस तरह के सभी पुरास्थलों में जो इमारतें और चीजें मिली उन्हें हड़प्पा सभ्यता की इमारतें कहा गया । इन शहरों का निर्माण लगभग 4700 साल पहले हुआ था । इन नगरों की विशेषता क्या थी ?  इन नगरों में से कई को दो या उससे ज्यादा हिस्सों में विभाजित किया गया था । पाय : पश्चिमी भाग छोटा था लेकिन ऊँचाई पर बना था और पूर्वी हिस्सा बड़ा था लेकिन यह निचले इलाके में था । ...

आखेट - खाद्य संग्रह से भोजन उत्पादन तक

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◆ आरंभिक मानव : आखिर वे इधर - उधर क्यों घूमते थे ?  हम उन लोगों के बारे में जानते हैं , जो इस उपमहाद्वीप में बीस लाख साल पहले रहा करते थे । आज हम उन्हें आखेटक - खाद्य संग्राहक के नाम से जानते हैं । भोजन का इंतजाम करने की विधि के आधार पर उन्हें इस नाम से पुकारा जाता है । आमतौर पर खाने के लिए वे जंगली जानवरों का शिकार करते थे , मछलियाँ और चिड़िया पकड़ते थे , फल - मूल , दाने , पौधे - पत्तियाँ , अंडे इकट्ठा किया करते थे । आखेटक - खाद्य संग्राहक समुदाय के लोग एक जगह से दूसरी जगह पर घूमते रहते थे । ऐसा करने के कई कारण थे । पहला कारण यह कि अगर वे एक ही जगह पर ज़्यादा दिनों तक रहते तो आस - पास के पौधों , फलों और जानवरों को खाकर समाप्त कर देते थे । इसलिए और भोजन की तलाश में इन्हें दूसरी जगहों पर जाना पड़ता था । दूसरा कारण यह कि जानवर अपने शिकार के लिए या फिर हिरण और मवेशी अपना चारा ढूँढ़ने के लिए एक जगह से दूसरी जगह जाया करते हैं । इसीलिए , इन जानवरों का शिकार करने वाले लोग भी इनके पीछे - पीछे जाया करते होंगे । तीसरा कारण यह कि पेड़ों और पौधों में फल - फूल अलग - अलग मौसम में आते हैं , ...

क्या , कब , कहाँ और कैसे ?

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● कैसे पता लगाएँ ?  यह जानने के लिए कि कल क्या हुआ था , तुम रेडियो सुन सकते हो , टेलीविजन देख सकते हो या फिर अखबार पढ़ सकते हो । साथ ही यह जानने के लिए कि पिछले साल क्या हुआ था , तुम किसी ऐसे व्यक्ति से बात कर सकते हो जिसे उस समय की स्मृति हो । लेकिन बहुत पहले क्या हुआ था यह कैसे जाना जा सकता है ?  __________________________________________ ● अतीत के बारे में हम क्या जान सकते हैं ?  अतीत के बारे में बहुत कुछ जाना जा सकता है - जैसे लोग क्या खाते थे , कैसे कपड़े पहनते थे , किस तरह के घरों में रहते थे ? हम आखेटकों ( शिकारियों ) , पशुपालकों , कृषकों , शासकों , व्यापारियों , पुरोहितों , शिल्पकारों , कलाकारों , संगीतकारों या फिर वैज्ञानिकों के जीवन के बारे में जानकारियाँ हासिल कर सकते हैं । यही नहीं हम यह भी पता कर सकते हैं कि उस समय बच्चे कौन - से खेल खेलते थे , कौन - सी कहानियाँ सुना करते थे , कौन - से नाटक देखा करते थे या फिर कौन - कौन से गीत गाते थे । __________________________________________ ●  लोग कहाँ रहते थे ?   कई लाख वर्ष पहले से लोग इस नदी के तट पर रह...

परमेश्वर का विचार

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 बड़े - बड़े राज्यों के उदय होने से पहले , भिन्न - भिन्न समूहों के लोग अपने - अपने देवी - देवताओं की पूजा किया करते थे । जब लोग , नगरों के विकास और व्यापार तथा साम्राज्यों के माध्यम से एक साथ आते गए , तब नए - नए विचार विकसित होने लगे । यह बात व्यापक रूप से स्वीकार की जाने लगी कि सभी जीवधारी अच्छे तथा बुरे कर्म करते हुए जीवन - मरण और पुनर्जीवन के अनंत चक्रों से गुजरते हैं । इसी प्रकार यह विचार भी गहरे बैठ गया था कि सभी व्यक्ति जन्म के समय भी एक बराबर नहीं होते हैं । यह मान्यता कि सामाजिक विशेषाधिकार किसी उच्च परिवार अथवा ऊँची जाति में पैदा होने के कारण मिलते हैं , कई पांडित्यपूर्ण ग्रंथों का विषय था । अनेक लोग ऐसे विचारों के कारण बेचैन थे । इसलिए वे बुद्ध तथा जैनों के उपदेशों की ओर उन्मुख हुए , जिनके अनुसार व्यक्तिगत प्रयासों से सामाजिक अंतरों को दूर किया जा सकता है और पुनर्जन्म के चक्र से छुटकारा पाया जा सकता है । कुछ अन्य लोग परमेश्वर संबंधी इस विचार से आकर्षित हुए कि यदि मनुष्य भक्तिभाव से परमेश्वर की शरण में जाए , तो परमेश्वर , व्यक्ति को इस बंधन से मुक्त कर सकता है । श्रीमद्भगव...